सर्वोच्च न्यायालय की पीठ द्वारा सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2020 को स्थगित करने से मना कर दिया गया है। जानिए क्या है पूरा मामला

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2020 में अब सिर्फ चार दिन बचे हैं। परीक्षा 4 अक्टूबर 2020 को होनी है। लेकिन अब भी इसपर कोरोना महामारी की वजह से संशय बरकरार था कि यह परीक्षा टलेगी या नहीं, इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में आज (30 सितंबर 2020) सुनवाई हुई
कोविड-19 और बाढ़ के हालात के मद्देनजर याचिकाकर्ताओं ने इस परीक्षा को दो से तीन महीने आगे बढ़ाने की अपील की थी 
इस मामले पर 28 सितंबर 2020 को सुनवाई हुई थी। 
 यूपीएससी की प्री परीक्षा में लगभग 7 घंटे का समय लगता है।  यूपीएससी की ओर से वकील नरेश कौशिक ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि 'मुझे लगता है कि परीक्षा स्थगित की बात पर सहमत होना बिल्कुल भी संभव नहीं है। मौजूदा हालात का ध्यान रखते हुए एक बार परीक्षा स्थगित की जा चुकी है। लेकिन दोबारा ऐसा करना परीक्षा की पूरी प्रक्रिया को क्षति पहुंचाएगा।'


इस पर कोर्ट ने यूपीएससी को निर्देश दिया है कि वह हलफनामा के जरिए सुप्रीम कोर्ट को परीक्षा स्थगित न कर पाने के तार्किक कारण बताए। कोर्ट ने आयोग को हलफनामा जमा करने के लिए मंगलवार, 29 सितंबर 2020 का समय दिया था। 
 आज कोर्ट इस पर अपना फैसला सुनाया और सर्वोच्च न्यायालय की पीठ द्वारा सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2020 को स्थगित करने से मना कर दिया गया  है। यानी कि अब एग्जाम 4 अक्टूबर को ही होगा जो पहले से निर्धारित तिथि थी 

न्यायालय द्वारा कहा गया कि आयोग परीक्षा के लिए जरूरी सभी नियमों का पालन करते हुए आवश्यक इंतजाम करे। यूपीएससी से कहा गया कि  'कफ-कोल्ड' पीड़ित उम्मीदवारों को अलग बैठाने की व्यवस्था करे ताकि अन्य उम्मीदवारों को इससे संक्रमण न हो सके। वहीं, संघ लोक सेवा आयोग ने उच्चतम न्यायालय में चल रही सुनवाई के दौरान अपने हलफनामा में जानकारी दी कि यदि सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा स्थगित की जाती है तो परीक्षा के आयोजन की तैयारियों पर हुए 50 करोड़ रुपये के व्यय का नुकसान हो सकता है।

इससे पहले यूपीएससी द्वारा 4 अक्टूबर को प्रस्तावित सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2020 को लेकर सुनवाई 25 सितंबर को हुई थी। प्रारंभिक परीक्षा को स्थगित करने को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में वासीरेड्डी गोवर्धन साई प्रकाश समेत कुल 20 यूपीएससी उम्मीदवारों द्वारा गुहार लगायी गयी है। इस याचिका में इन उम्मीदवारों को पक्ष अधिवक्ता अलख श्रीवास्तव रख रहे हैं। वहीं, परीक्षा को स्थगित किये जाने को लेकर असिस्टेंट कमांडेंट स्तर के एक सरकारी अधिकारी द्वारा भी गुहार लगायी गयी है।


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